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देहरादून के कालसी उपवन प्रभाग क्षेत्र में हो रहा हजारों हरे-भरे पेड़ों का कत्लेआम

विकासनगर बाडवाला क्षेत्र में बिना विभागीय अनुमति के सैकड़ों बीघा भूमि पर साल के वृक्षों को काटे जाने का मामला प्रकाश में आया है कई सामाजिक संगठनों के विरोध करने के बावजूद भी जंगलात विभाग ने चुप्पी साधी हुई है।

आपको बता दें कि कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग राजा वाला क्षेत्र में एक व्यक्ति के द्वारा अपनी निजी भूमि को समतल बनाने की आड़ में हजारों साल के हरे भरे वृक्षो पर आरियां चलाई जा रही है समाजसेवी नरेश कुमार तोमर ने इस पूरे प्रकरण की एक लिखित शिकायत उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी से मिल कर की है जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि ग्राम पंचायत बाड़वाला के राजा वाला में कुछ महीनों से एक व्यक्ति अपनी निजी भूमि को समतल करने की आड़ में जंगलात विभाग की भूमि पर भी जेसीबी मशीन चला कर अतिक्रमण करने का काम कर रहा है और उस भूमि पर खड़े हजारों साल के वृक्षों को लगातार कटान कर रात के अंधेरे में गाड़ियों में भरकर वन विभाग की चेकपोस्ट बाडवाला के रास्ते ठिकाने लगाने का काम कर रहा है जिससे पर्यावरण और राज्य की संपदा को तो भारी नुकसान पहुंचा ही रहा है उक्त व्यक्ति के द्वारा एनजीटी के मानकों और नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं दूसरा वन विभाग की सैकड़ों बीघा भूमि पर अतिक्रमण करने का कार्य उक्त व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है।

नरेश कुमार तोमर के द्वारा यह भी बताया गया कि उक्त प्रकरण को कई बार डीएफओ कालसी व रेंज अधिकारी सहसपुर के संज्ञान में भी लाया गया है परंतु विभागीय अधिकारी व कर्मचारी मौन धारण किए हुए हैं इससे ऐसा प्रतीत होता है कि वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से उक्त गंभीर प्रकरण को अंजाम दिया जा रहा है नरेश कुमार तोमर के द्वारा उत्तराखंड प्रमुख वन सरक्षक से गुहार लगाई है कि उक्त प्रकरण की जांच कर इस कुकृत्य को अंजाम देने बालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए जिससे कि उत्तराखंड राज्य की वन संपदा और वन भूमि की सुरक्षा हो सके।

वही इस संबंध में उत्तराखंड प्रमुख वन संरक्षक के द्वारा कहा गया कि जैसे ही मामला शिकायतकर्ता के द्वारा उनके संज्ञान में लाया गया मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके द्वारा तुरंत 3 दिन में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दे दिए गए हैं आगे की कार्यवाही रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

वही जब इस संबंध में सहसपुर रेंज अधिकारी अयामुद्दीन सिद्दीकी से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि एक दिन पहले ही उनके मामला संज्ञान में आया उनके और उनकी टीम के द्वारा तुरंत मौके पर जाकर पेड़ों की गिनती की गई और भूस्वामी के खिलाफ जुर्म काट दिया गया है और अधिकतम कठोर कार्यवाही की जाएगी।

अब सवाल यहां यह उठता है कि

-जैसा ज्ञात हुआ है कि पूर्व में भी उक्त भूस्वामी के द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध पातन किया गया था उस समय कार्यवाही करने में कौन सी ढील रह गई थी जो उक्त भूस्वामी वर्तमान में बेखौफ होकर फिर से साल के हजारों पेड़ों का अवैध पाटन करने में क्यों जुट गया?

-दूसरा जब पेड़ों को काटा जाता है तब वन विभाग के उस क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों व अधिकारियों को क्यों नहीं पता चलता आखिर जब कोई समाजसेवी या मीडिया इस बात को उठाता है तभी क्यों पता चलता है?

-तीसरा अवैध पाटन कर लकड़ियों को गाड़ी में भरकर जिस रास्ते से ले जाया जाता है उस रास्ते में बाढ़ वाला जंगलात बैरियर चौकी पडती है आखिर उनको यह भरी हुई गाड़ियां जाती हुई क्यों नहीं दिखती?

-क्या सारे नियम व कानून सिर्फ आम जनमानस के लिए ही हैं?

अगर जल्द इस तरह के आवैध कटानो पर रोकना लगी तो उत्तराखंड में जल जंगल जमीन कुछ नहीं बचेगा क्योंकि लगातार भू माफियाओं द्वारा जंगलात की भूमि पर हो या चाहे निजी भूमि पर खड़े हरे भरे पेड़ों को काटकर प्लाटिंग करने के मामले सामने आते रहते हैं और विभाग कार्यवाही के नाम पर गेंद गेंद खेलते हैं कभी गेंद इस विभाग के पाले में फेंकते हैं तो कभी दूसरे विभाग के पाले में।
मु.संपादक-राजिक खान

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